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बिहार में पर्यटन विभाग के अभियंता पर निगरानी का शिकंजा, छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले

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Alam Ki Khabar: बिहार में आय से अधिक संपत्ति के मामले में पर्यटन विभाग के अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार सिन्हा के ठिकानों पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की छापेमारी में फ्लैट, भूखंड, बैंक खाते, आभूषण और निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है।

पटना, 19 जुलाई। आलम की खबर: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पर्यटन विभाग के अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार सिन्हा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के क्रम में उनके विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर निगरानी विभाग का कहना है कि अभियंता के पास ज्ञात आय की तुलना में काफी अधिक संपत्ति होने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद विधिवत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

छापेमारी के दौरान जांच अधिकारियों को अभियंता के नाम पर तीन फ्लैट और 12 भूखंडों से संबंधित दस्तावेज मिले हैं। इन सभी संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद प्रक्रिया और वर्तमान बाजार मूल्य का आकलन किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों के लिए धन किस स्रोत से उपलब्ध कराया गया और क्या यह उनकी वैध आय के अनुरूप है।

निगरानी टीम को जांच के दौरान 19 बैंक खातों की जानकारी भी मिली है। इसके अलावा बीमा योजनाओं में निवेश, वित्तीय लेनदेन तथा अन्य आर्थिक दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी बैंक खातों का विवरण जुटाकर लेनदेन की जांच की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इनमें जमा धनराशि का स्रोत क्या है।

जांच के दौरान पटना के आशियाना नगर स्थित फ्रेंड्स कॉलोनी में अभियंता द्वारा खरीदी गई भूमि और उस पर निर्मित मकान से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर भूमि खरीद और भवन निर्माण में हुए खर्च का सत्यापन किया जा रहा है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसे भी केस डायरी का हिस्सा बनाया जाएगा।

निगरानी विभाग ने छापेमारी के दौरान नकदी, सोने, हीरे और चांदी के आभूषण भी बरामद किए हैं। साथ ही एक कार और अन्य मूल्यवान संपत्तियों का भी विवरण तैयार किया गया है। बरामद सभी वस्तुओं का मूल्यांकन कराया जा रहा है और उन्हें जांच रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार बीमा योजनाओं में किए गए निवेश की भी विशेष रूप से जांच होगी। यह देखा जाएगा कि प्रीमियम का भुगतान किस माध्यम से किया गया तथा निवेश की राशि वैध आय से मेल खाती है या नहीं। जांच एजेंसी ने संबंधित वित्तीय संस्थानों से भी आवश्यक जानकारी मांगी है।

इधर, बिहार में अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई भी जारी है। हाल ही में बांका जिले में की गई कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए थे। हालांकि दोनों मामलों की जांच अलग-अलग एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर कर रही हैं।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो का कहना है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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संपादकीय

भ्रष्टाचार के मामलों में समयबद्ध और निष्पक्ष जांच शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता को मजबूत करती है। हालांकि किसी भी आरोपी को जांच पूरी होने से पहले दोषी मानना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम निर्णय होना चाहिए। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो कड़ी कार्रवाई और यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो निष्पक्षता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

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